लॉकडाउन के क्या हैं नुकसान (Disadvantage of Lockdown in India)

लॉकडाउन के नुकसान क्या हैं


       दुनिया में कोरोना वायरस के चलते लोगो को अनेक समस्याओंका सामना करना पड़ रहा है। चायना के वुहान नामक शहर से एक बीमारी निकली जिसने पूरी दुनिया को अपने चपेट में ले लिया। इस बीमारी का कोई इलाज अभी तक नहीं मिल पाया है। हालाँकि इसकी खोज पूरी दुनिया मिलकर कर रही है। जबतक इसका कोई ठोस इलाज या दवाई नहीं मिल पाती तबतक कोरोना की दहशत पूरी दुनिया पर जोर मारती रहेगी।   

क्या है कोरोना और इससे पूरी दुनिया क्यों डर रही है ? 

        वुहान के स्वास्थ आयोग ने 31 दिसम्बर 2019 को WHO को बताया के वहा निमोनिया के मामले बढे है। अंत में कोरोना वायरस की पहचान कर ली गयी। धीरे धीरे यह वायरस चायना में तेजी से बढ़ने लगा। 13 जनवरी 2020 को आधिकारिक तौर पर चायना के बहार पहला Covid-19 का मरीज थायलैंड में पाया गया।

        यह एक ऐसी बीमारी है जो पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलती है। इसी वजह से इसकी तीव्रता कई गुना अधिक है। अपने इसी गुणधर्म की वजह से यह बीमारी एक महामारी के रूप में उभर कर आयी है। दुनिया की जनसंख्या और आपसी खुल-मिलने का तरीका जिसके कारण यह बीमारी और भी रौद्र रूप धारण करती है।  

क्या होता है लॉकडाउन? 

      लॉकडाउन एक आपातकालीन प्रोटोकॉल है जो लोगों को किसी दिए गए क्षेत्र को छोड़ने से रोकता है। लॉकडाउन ऐसे स्थिति में लगाया जाता है जब लोगो के स्वतंत्र व्यव्हार से या सामुदायिक गतिविधियों के कारण सार्वजानिक स्वस्थ्य या फिर सामुदायिक आपदा की परिस्थिती निर्माण होने का खतरा हो।
   


आईये जानते है लॉकडाउन से कितना फायदा हुआ और क्या नुकसान हुए।  

        लॉकडाउन के परिणामो पर काफी बहस हो सकती है। समयसूचकता और कोरोना के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए पूरी दुनिया को बंद कर देना यानी लॉकडाउन करवाना काफी महत्वपूर्ण था। विश्व के लगभग सरे देशो ने अपने यहाँ काम या ज्यादा समय तक लॉकडाउन रखा।  

      भारत में अचानक हुए लॉकडाउन पर काफी मत-मतांतर रहे है। लॉकडाउन किया जाने की वजह से कोरोना का भारत में अपेक्षा से काम हुआ है। जो एक अच्छा चिन्ह है। संक्रमित लोगोका पता लगा कर उन्हें अलग किया गया और इलाज हुआ। 

मगर इस अचानक किये गए फैसले से लोगो को भरी नुकसान भी सहना पड़ा। 
  1. असुरक्षित रोजगार: भारत में केवल 17% कामगारोंके के पास वेतनभोगी नौकरियां हैं; एक तिहाई कैजुअल मजदूर हैं। विश्व बैंक के अनुसार, 76% भारत में 'असुरक्षित रोजगार' में हैं।  हमने पिछले दिनों कई मजदूरों को पैदल अपने अपने गांव जाते देखा और सुना। नौकरी न होने के कारण वे अपने खर्चे पुरे नहीं कर पा रहे - जैसे मकान का किराया, जरूरत का सामान खरीदना, यहातक के समय पर इलाज/ दवाई के खर्चे। - क्योंकि उनके पास कोई बचत नहीं थी के वे उसे इस कठिन समय में काम ला सके। 
  2. व्यापार: कोरोना को रोकने के लिए किये गए लॉकडाउन से व्यापर पर भी काफी गहरा असर पड़ा है। लघु,मध्यम उद्योग एवं व्यापार ठप्प हो गए है। कई लोगो को नौकरियोंसे हाथ धोने पड़े। पिछले साल दिसम्बर तक ही देश के Economy की हालत ख़राब थी। जीडीपी का आंकड़ा लगातार गिर रहा था। Airline, Travels, Cruise, Construction, Tourism, Share Market जैसे कई व्यापर मंदी की चपेट में आ गए। कई लोग बेरोजगार हुए है और देश की अर्थव्यवस्था को भी भरी नुकसान पहुंचा है।    
  3. शिक्षा: लॉकडाउन के कारण शिक्षा पर भी काफी असर पड़ा है। हर साल मार्च से सभी स्कूल और कॉलेजेस के Exams होते है। मगर Schools, Collages, Tution Institutes के भी बंद हो जाने की वजह से Exams का होना मुश्किल हो चूका है। काफी गरीब परिवारों के पास और गांव में Internet की असुविधा की वजस से Online Study भीकरण अधिकतर विद्यार्थियों के लिए संभव नहीं हो पा रहा है।  
  4. स्वस्थ्य सुविधाओंकी कमी: कोरोना के बढ़ते प्रभाव से कई निजी डॉक्टरोंने अपने क्लिनिक बंद रखे है यहाँ तक की कायो बड़े अस्पताल भी कोरोना के मरीजों के लिए आवंटित किये गए है। जिसके कारन दूसरे मरीजों को इलाज में देरी या कठिनाईंयोंका मुकाबला करना पड रहा है।   
  5. अत्यावश्यक सामान की कमी: लॉकडाउन के नुकसान में एक यह भी नुकसान हुआ है की जो अत्यावश्यक सामान जैसे सब्जी, फल, राशन के आवाजाही में काफी कमी हुई है। लोगों ने भय की वजस से अतिरिक्त सामान घरों में जमा किया; जिसकी वजह से बाजार में अत्यावश्यक सामान की कमी होने लगी है। और इसी वजह से उपलब्ध समानोंके मूल्यों में भी भरी बढ़त दिख रही है।  
       कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए लॉकडाउन करना जरूरी था जैसा के दुनिया के सरे देशों ने किया। भारत में भी इसका होना भारत की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए अनिवार्य था। लेकिन आर्थिक मंडी से निकलने के लिए और भारतीय अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने के लिए व्यापारों को बढ़ावा देना भी उतना ही जरूरी हो गया है। व्यापर और उद्योग बढ़ने से बेरोजगारी पर भी अंकुश आएगा और भारत फिरसे महासत्ता बनने के अपने धेय्य की तरफ अग्रेसर होगा।  


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