5 Important Facts That You Should Know About Business Risk After Lockdown.


           कोरोना का कहर अब भी पूरी दुनिया पर जारी है। यह भी कहा जा सकता है कि भले ही दुनिया अपने लॉकडाउन वाली परिस्थिती से धीरे धीरे बहार आ रही हो पर कोरोना के संक्रमण का रुकना उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पाया है। 
भारत भले ही कृषि प्रधान देश है लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूतिकरण में लघु और माध्यम वर्ग के व्यापारों का बड़ा हाथ है।  
कोरोना की वजह से न सिर्फ जीवित हानि हुई है लेकिन सबसे ज्यादा आर्थिक हानि हुई है। इस वक़्त कई देश आर्थिक संकट से झुज रहे है। लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियां बंद हो गयी और दुनिया अपने अपने घरो में कैद हो गयी। सभी फैक्ट्रीज, ऑफिस, मॉल्स, व्यापर व  व्यवसाय बंद थे। वजह रही कोरोना वायरस के community spread। 

लॉकडाउन के बाद Business की ५ सबसे बड़ी चुनौतियाँ 

लगभग ढाई महीने से भारत में लॉकडाउन है और अब Unlock Phase शुरू हो रहा है। व्यापर खुलेंगे और लोग बाहर  निकलना शुरू होंगे। व्यापार को दुबारा पटरी पर लाने की तैयारियोंके बिच हमें कुछ आने वाली चुनौतियों के बारे में अवगत होना जरूरी है। 



१. सामाजिक दुरी या SOCIAL DISTANCING

      अत्याधिक संक्रमक बीमारियों को रोकने के लिए या उसकी संक्रमण क्षमता को कम करने के लिए सामाजिक दुरी या SOCIAL DISTANCING का उपयोग किया जाता है। मार्च २०२० से लॉकडाउन के स्थिति में अत्यावश्यक कारणों के लिए Social Distancing के पालन के साथ घरोंसे बहार निकलनेकी अनुमति दी गयी थी। अब जब सरकार द्वारा व्यापार शुरू करने की अनुमति दे दी गयी है तो Social Distancing का पालन करना कितना संभव हो पायेगा? Meetings, Training और Manufacturing में कई लोग एक जगह जमा होते है। ऐसे में कोरोना संक्रमण से बचने के क्या उपाय हो सकते है? 

२. मंदी या Recession 

         जानकार इस मंदी को सन २००८-०९ में आयी जागतिक आर्थिक मंदी से बड़ी मंदी  मानते है। क्योंकि उस वक्त लोग काम पर जा रहे थे और कंपनिया Yearly Growth के कारण मजबूत स्थिति में थी, सरकारी Finance System अच्छा था। मगर इस बार ऐसे हालात नहीं है। 
The International Monetary Fund यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है के कोरोना वायरस के वजस से दुनिया में अबतक की सबसे बड़ी मंदी आयी है। इससे पहले United Nation ने अपने Trade रिपोर्ट में यह कहा था के दुनिया आर्थिक मंदी के तरफ बढ़ रहा है; जिससे दुनिया के कई देश बेहद मुश्किल में आ जायेंगे। ऐसे में भले ही व्यापर पुनः शुरू ह जाये लेकिन उनके उत्पादनो को ग्राहक के कमी का सामना करना पड़ सकता है। 

३. Vendor Management 

अधिकांश कंपनियां अपने व्यवसाय के लिए Vendors पर निर्भर है। फार्मासूटिकल्स से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां रॉ-मटेरियल के लिए Vendors पर निर्भर होती है। आवश्यकता और पूर्ति इनका जोड़ व्यापर में महत्वपूर्ण रहेगा। ऐसे स्थिति में Vendor Management का अहम किरदार व्यापर को बढ़ाने में होगा।   

४. कर्मचारी उत्पादकता या Employee Productivity 

कोरोना महामारी के कारण हर उद्योग आने वाले समय में अच्छे कर्मचारी के तलाश में होगा। इस समय उद्योगोमे कर्मचारियोंकी भरी कमतरता महसूस होगी। इसके मुख्य दो कारण है - 
१. काफी मात्रा में मजदूर अपने काम की जगह से अपने अपने गाँव या शहरोंमें लौट गए है; लॉकडाउन के समय उद्योगों का बंद होना और पैसो की कमी ने उनको स्थलांतर करने पर मजबूर किया। २. करोना के संक्रमित मजदूरोंकी संख्या भी लक्षणिय है; या तो मजदूर संक्रमित है या फिर उनके परिवार में से कोई, जिसके कारण अनेक मजदूर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से काम करने में असमर्थ है। जिसके कारण Employee संख्या की कमी और उनकी Productivity दोनों पर असर पड़ेगा। इसितरह काम करने के तरीको में भी अनेक बदलाव लाये जा सकते है जिसका सीधा असर Productivity पर भी पड़ेगा।         

५. Geopolitical Risk

Geopolitical Risk - करोना वायरस से बाजार के व्यावसायिक तरीको में काफी बदलाव आया है। सरकार की तरफ से व्यापर नियमोंमें काफी बदलाव लाये जा रहे है और आगे भी काफी बदलाव होते रहेंगे। व्यापर के पारंपरिक मूल्योंमे आये दिन बदलाव देखा जायेगा। जिसका असर व्यापारों पर पद सकता है। आंतरराष्ट्रीय व्यापर में भरी गिरावट देखी जा सकती है साथ ही विश्वभर में राजनैतिक चढउतार के कारण व्यापर की चुनौतियां बढ़ सकती है।   

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